Home Business / Finance You can’t go to Antarctica But why

You can’t go to Antarctica But why

0
0
Today News Breaking News Trending News Latest Update Viral News Today Headlines Top Stories India News World News Today Live News Big Breaking Exclusive News Fact Check Hot Topic Social Media Viral Political News Crime News Business News Entertainment News Tech News Sports Update #TodayNews #BreakingNews #ViralNews #LatestUpdate #TopHeadlines #IndiaNews #WorldNews #NewsAlert #LiveUpdate #TrendingNow #ExclusiveNews #MediaReports #PressNews #TodayHeadlines Today News, Breaking News, Viral News, Live Updates, Latest Headlines, Top Stories Today, Indian Newspaper, Trending Topics, Fact Check, Daily News Updates, Politics, Business, Technology, Sports, Entertainment Entertainment / Bollywood Sports / Cricket Politics / Crime Technology Business / Finance World News Health / Science Local Punjab News Mixed All Categories
Today News Breaking News Trending News Latest Update Viral News Today Headlines Top Stories India News World News Today Live News Big Breaking Exclusive News Fact Check Hot Topic Social Media Viral Political News Crime News Business News Entertainment News Tech News Sports Update #TodayNews #BreakingNews #ViralNews #LatestUpdate #TopHeadlines #IndiaNews #WorldNews #NewsAlert #LiveUpdate #TrendingNow #ExclusiveNews #MediaReports #PressNews #TodayHeadlines Today News, Breaking News, Viral News, Live Updates, Latest Headlines, Top Stories Today, Indian Newspaper, Trending Topics, Fact Check, Daily News Updates, Politics, Business, Technology, Sports, Entertainment Entertainment / Bollywood Sports / Cricket Politics / Crime Technology Business / Finance World News Health / Science Local Punjab News Mixed All Categories

बात है अगस्त 1946 की अमेरिका की नेवल फ्लीट जबरदस्त हथियारों से लैस होकर अंटार्कटिका की तरफ रवाना होती है और उनका मकसद था साइंटिफिक रिसर्च एंड ट्रेनिंग पर अमेरिका कभी भी रिसर्च के लिए अंटार्कटिका नहीं जा रहा था बल्कि उसके दो मकसद थे पहला अंटार्कटिका पे कब्जा और दूसरा फ्लाइंग सोसर नाम के हथियार को कब्ज आना जो अंटार्कटिका में मौजूद था तो क्या अमेरिका को हथियार मिला सिर्फ हथियार ही नहीं और भी बहुत कुछ मिला कुछ ऐसा मिला जिसने पूरी दुनिया को एक समझौता साइन करने पर मजबूर कर दिया कि अंटार्कटिका में अब कोई नहीं जाएगा यह समझौता आज भी लागू है तो फिर अगर कोई अंटार्कटिका जाना चाहे तो वो कैसे जाए अंटार्कटिका में जाने के लिए आपको स्पेशल परमिशन लेनी पड़ेगी जो कि आपको कभी नहीं मिलेगी और अगर मिल भी गई तो वहां पर कुछ जगह ऐसी है जहां आपको जाने ही नहीं दिया जाएगा तो अब अगर आपने अंटार्कटिका जाने का विचार त्याग दिया हो तो आगे चलते हैं छ से ठ महीने चलने वाला मिशन कैसे 40 दिन में खत्म हो गया और अमेरिकी इतिहास के सबसे डेकोरेटेड नेवल ऑफिसर कैसे तीन घंटे के लिए टाइम ट्रेवल लूप में फंस गए थे

चलिए पता करते हैं वर्ल्ड वॉर ट के शुरू होने से पहले दिसंबर 1938 में हिटलर ने जबरदस्त खोजी अभियान पूरी दुनिया में शुरू कर दिए थे हिटलर को ऐसा लगता था कि धरती पर ऐसी बहुत सारी चीजें हैं जिनका इस्तेमाल करके वो ऐसे हथियार बना सकता है जिनका मुकाबला कोई भी नहीं कर पाएगा 17 दिसंबर 1938 को एस शबन लैंड सीक्रेट मिशन के लिए अंटार्कटिका की तरफ रवाना होता है लेकिन गौर करने की बात यह थी कि इस जहाज पर थली सोसाइटी के लोग भी थे यानी वैज्ञानिकों और इंजीनियर्स के अलावा थली सोसाइटी के लोग भी जा रहे थे अब ये थली सोसाइटी कौन है देखिए थली सोसाइटी ऐसे जर्मन लोग का एक समूह था जो यह मानते थे कि हमारी धरती पर मनुष्यों से ज्यादा एडवांस सिविलाइजेशन के लोग भी रहते हैं जिन्हें आर्यंस कहा जाता था जिनका जिक्र बहुत सारे संस्कृत ग्रंथों में भी है तो हिटलर के द्वारा भेजे गए इस मिशन के दो मकसद थे पहला आर्यन से संपर्क करना और दूसरा एक अंडरग्राउंड बेस स्थापित करना और अगर आर्यन से संपर्क हो जाता है तो उन्हें मनाना कि

वो अपनी टेक्नोलॉजी उनके साथ साझा करें अब इस जहाज को अंटार्टिका पहुंचने में एक महीने का समय लगता है और पहुंचने के बाद तीन हफ्ते तक नाजी सेना जगह-जगह भटक टक्कर बेस बनाने के लिए सही लोकेशन का चुनाव करती है और उन्हें वहां पर एक गर्म पानी की झील मिलती है अब इसी लोकेशन पर नाजी सेना अपना एक बेस बनाती है जिसे इतिहास में बेस 211 के नाम से जाना जाता है अब वर्ल्ड वॉर ट के खत्म होते-होते बेस 211 का साइज बहुत बड़ा हो जाता है लगभग एक शहर जितना ये एक ऑफेंसिव बेस था यानी यहां पर जर्मन की यूबोट और बहुत बड़ी तादाद में मिसाइलें इकट्ठा करके रखी गई थी लेकिन जब नाज जंग हारते हैं तो वो भागकर जर्मनी से भागकर इसी बेस की तरफ आए थे और जो नहीं आ पाए वो साउथ अम अमेरिका में अर्जेंटीना की तरफ निकल गए जिस समय हिटलर की सेना लगातार हारती जा रही थी तो बहुत बड़ी तादाद में खाने पीने की सप्लाई कपड़े हथियार सोना चांदी कीमती सामान इन सबको भरके अंटार्कटिका की तरफ रवाना कर दिया गया था अब वर्ल्ड वॉर ट के खत्म होने के बाद अमेरिका में यूएफओ दिखना यह बहुत ही आम घटना हो गई थी हर दूसरे दिन कोई ना कोई यूएफओ अमेरिका के आसमान में दिख ही जाता था अमेरिकंस को यह शक था कि कहीं ये यूएफओ नाज जर्मनी के द्वारा तो नहीं बनाए

गए क्योंकि हिटलर की सीक्रेट वेपन डिवीजन का कमांडर हेंस कमलर ऐसे ही अजीब हथियार बना बनाने के लिए पूरी चर्चा में था एंस कमलर ने नाज जर्मनी के वैज्ञानिकों से जेयू 390 नाम के दो एयरप्लेन बनवाए थे जो 4000 मील तक बिना रिफ्यूल के बड़ी आसानी से उड़ सकते थे ये उस जमाने में बहुत बड़ी बात थी और अमेरिकी सरकार को इस बारे में अपने जासूस पल-पल की खबर मिल रही थी लेकिन अप्रैल 1945 में एक जेयू 390 विमान हेंस कमलर के साथ गायब हो जाता है जो फिर दोबारा कभी नहीं मिलता अमेरिकंस के दिमाग में इस शक का बीज पड़ जाता है कि हेंस कमलर अंटार्कटिका में बैठकर फ्लाइंग सौसर नाम का सीक्रेट हथियार बना रहा है और इस चीज को पता करने का सिर्फ एक ही तरीका था अंटार्कटिका में जाकर पता करना और यहां शुरुआत होती है अमेरिकी सरकार के द्वारा चलाए गए ऑपरेशन हाई जंप ऑपरेशन विंड मिल और ब्रिटिश सरकार के द्वारा चलाए गए ऑपरेशन टर्बन की लेकिन इस वीडियो के लिए हम सिर्फ ऑपरेशन हाई जंप के बारे में ही बात करेंगे अब जो मैं बताने जा रहा हूं उसे बहुत ध्यान से सुनिए अब अमेरिका को एक ऐसा इंसान चाहिए था जिस पर वो पूरा भरोसा कर सके इस ऑपरेशन को लेकर पूरा भरोसा कर सके और वो इंसान था रिचर्ड एवलिन बर्ड जूनियर नाम पे मत जाओ इस इंसान के बारे में बताऊंगा तो आपको यकीन नहीं होगा ये इंसान अमेरिकन नेवी इतिहास में यंगेस्ट एडमिरल बना था इस इंसान को अमेरिकन

आर्म्ड फोर्सेस में हाईएस्ट मिलिट्री ओनर यानी के मेडल ऑफ ऑनर भी मिला था इसे नेवी की तरफ से नेवी क्रॉस सर्विस मेडल लीजन ऑफ मेरिट फ्लाइंग क्रॉस और कांग्रेश गोल्ड मेडल भी मिला था अगर इस मिशन को करने के लिए किसी पर अमेरिकी सरकार भरोसा कर सकती थी तो वो यही इंसान था अब देखिए अमेरिका क्योंकि एक डेमोक्रेसी है तो अपने लोगों को आखिर ये बताना तो पड़ेगा कि वो अंटार्कटिका जा क्यों रहा है क्योंकि वो सीध सीधे-सीधे ये तो कह नहीं सकते कि हम उसी हिटलर को पकड़ने जा रहे हैं जिसे हमने कुछ ही महीने पहले निपटाया है अगर आपको यह सब सुनने में अजीब लग रहा है तो 1947 में पब्लिश सजाबो की किताब हिटलर इज अलाइव पढ़ लेना उसमें सब कुछ बताया है पर हम मान के चलते हैं कि हिटलर मर गया था तो सबसे पहले जान लेते हैं कि अमेरिका ने अपनी जनता के सामने अंटार्कटिका जाने से पहले कौन सा चूर परोसा था तो अमेरिकी सरकार बताती है कि वो अपने सोल्जर्स की ट्रेनिंग अपने इक्विपमेंट की टेस्टिंग अंटार्कटिका की जियोलॉजी और वेदर को स्टडी करने के लिए वहां जा रहे हैं और इसके साथ-साथ अगर रास्ते में कोई बढ़िया सी जगह दिख गई तो वहां पर एयर बेस बनाने का जुगाड़ भी देख लेंगे जिससे ये भी समझ में आ जाएगा कि जबरदस्त ठंडी जगहों पर एयर बेस कैसे बनाया जाएगा और ये सब करने के लिए उन्हें चंद सोल्जर्स की जरूरत है ज्यादा नहीं बस कुछ 5100 सोल्जर भेज देंगे बस और भोली भाली जनता यकीन भी कर लेती है भैया सरकार कह रही है झूठ थोड़ी कहेगी सरकार तो सब कुछ सच बताती है और ये लोग जो अंटार्कटिका में प्रयोगशाला बनाने जा रहे हैं उसके लिए जो सामान चाहिए वो क्या था वो भी सुन लो 13 नेवी के शिप एक एयरक्राफ्ट कैरियर जिस परे दर्जनों हवाई जहाज और हेलीकॉप्टर हर समय तैनात पूरे हथियार से लेस जिनकी सुरक्षा के लिए दो डिस्ट्रॉयर दो टैंकर सप्लाई शिप्स बर्फ तोड़ने के लिए आइस ब्रेकर जहाज हथियार से लेस दो सी प्लेन एक अटैक सबमरीन और दुनिया में पाए जाने वाले सबसे एडवांस हथियार बस ये छुटपुट सामान जा रहा था अंटार्टिका में रिसर्च करने के लिए मौसम विभाग वाली रिसर्च जैसा कि जनता को बताया गया था

लेकिन ऑपरेशन हाई जंप का एक दूसरा मकसद था सरकारें जनता को क्या बताती हैं इससे कोई लेना देना नहीं है सरकार कभी भी सच नहीं बताएगी नेवी से रिटायर होने के बाद आई विटनेसेस अ यानी कि सरकार के द्वारा डी क्लासिफाई करी गई रिपोर्ट्स लीक हुए सीक्रेट डॉक्यूमेंट और एडमिरल रिचर्ड के द्वारा खुद यह क्लेम किया गया है कि ये ऑपरेशन मौसम वसम से रिलेटेड तो बिल्कुल नहीं था बल्कि इसका मकसद कुछ और था पहला तो अंटार्टिका पे पूरी तरह से कब्जा करना जितनी जमीन मिल जाए जितनी जगह मिल जाए उतनी कब्जा लो और दूसरा नाज जर्मनी के द्वारा बनाया गया अंडरग्राउंड सीक्रेट मिलिट्री बेस को तबाह करना अगर वो मिल जाए तो बस जैसे ही वहां पर अमेरिका पहुंचा बर्फ की खुदाई चालू और वो एक छोटा सा मिलिट्री बेस बनाते हैं जिसका नाम र रखा गया लिटिल अमेरिका लेकिन जो मिशन छह से ठ महीने चलने वाला था वो भाई साहब 40 दिन के अंदर निपटा दिया गया मतलब खत्म कर दिया गया टर्मिनेट कर दिया गया और इतना खर्चा करके अमेरिका जो वहां पहुंचा था वो वहां से उल्टे पांव भाग लेता है और अब आता है सवाल कि ऐसा वहां पर क्या हुआ था जो अमेरिका को अपनी जान बचाने के लाले पड़ गए थे अब पहले तो मैं आपको ये बताता हूं कि वहां पर हुआ क्या था देखिए अमेरिका जो इतना सारा साजो सामान लेकर वहां पहुंचा था इस पर होता है हमला जबरदस्त हमला अब बात आती है ये कि ये हमला किया किसने था तो इसके बारे में खुद एडमिरल रिचर्ड ने मीडिया को बताया था एडमिरल रिचर्ड कहते हैं कि उनके ऊपर अजीब सी उड़ने वाली चीजों ने हमला किया था यानी कि फ्लाइंग सोसर और ये डिस्क लाइक चीजें दुनिया में कभी भी किसी भी देश पर हमला कर सकती हैं दुनिया का कोई भी हथियार इनकी रफ्तार को मैच नहीं कर सकता और पूरी दुनिया के सामने एक नया खतरा खड़ा हो गया है जिसका सामना कोई भी नहीं कर सकता अब ऐसी स्टेटमेंट के बाद जब एडमिरल रिचर्ड हायर अथॉरिटीज को ब्रीफ करते हैं यानी कि बताते हैं कि आखिर वहां पर क्या हुआ तो इस ब्रीफिंग के बाद सीधा उनका कुछ हफ्तों के लिए इंटेरोगेशन होता है और इंटेरोगेशन खत्म होने के बाद ऑपरेशन हाई जंप से रिलेटेड उन्होंने एक भी शब्द अपने जीवन में दोबारा नहीं बोला और इस पूरे मिशन को अमेरिकी सरकार टॉप सीक्रेट बताकर क्लासिफाई कर देती है इसके बाद नेवी एक नोटिफिकेशन जारी करती है कि अगर किसी नेवी के सैनिक यानी सेलर ने

ऑपरेशन हाई जमप से रिलेटेड कोई भी जानकारी पब्लिकली लीक करी तो उन्हें सीधा जेल में डाल दिया जाएगा नेवी के द्वारा दी गई ऑफिशियल स्टेटमेंट में उन्होंने यह बताया कि अंटार्कटिका में दुर्घटना होने की वजह से कुछ सैनिक वहां पर मारे गए थे और कमाल की बात यह है कि उनमें से एक भी सैनिक का शरीर अमेरिका नहीं लाया जाता बल्कि उन्हें वहीं दफन कर दिया जाता है लेकिन इससे भी ज्यादा हैरानी की बात यह थी कि जब एडमिरल रिचर्ड अंटार्कटिका के ऊपर से फ्लाई कर रहे थे तो व 3 घंटे के लिए गायब हो जाते हैं समय में गायब हो जाते हैं अब यह कैसे हो सकता है और होना तो छोड़ो आखिर इस बात का मतलब भी क्या है देखिए एडमिरल रिचर्ड हर चीज को डॉक्यूमेंट में लिखते थे यानी कागज पर लिखते थे और उसका रिकॉर्ड मेंटेन करते थे लेकिन जब वो अमेरिका वापस तो अमेरिकी नौसेना उनसे उनका सारा मटेरियल ले लेती है क्योंकि वो नेवी का मटेरियल था लेकिन एक चीज बच जाती है वो थी एडमिरल रिचर्ड की पर्सनल डायरी अब ये डायरी हाथ लगती है एडमिरल रिचर्ड की मृत्यु के बाद उनके बेटे को जिसमें एडमिरल रिचर्ड ने यह बात बताई है कि आखिर कैसे वो 3 घंटे के लिए टाइम ट्रेवल लूप में फंस गए थे अब क्योंकि अपने जीवन में उन्होंने इस बात का जिक्र कभी भी नहीं किया तो यहां से एक बात तो क्लियर है कि

एडमिरल रिचर्ड पक्के देशभक्त थे आइए अब जानते हैं कि उन्होंने ऐसा क्या देखा था समय था सुबह के 8:1 बजे बजेगा एडमिरल रिचर्ड सर्वे के लिए एक छोटे से जहाज का प्रयोग करते हैं जो डेढ़ दो घंटे की फ्लाइट कर सकता था और जैसे ही हवाई जहाज को उड़ने के लिए क्लीयरेंस मिलती है वो अपना प्लेन लेकर उड़ जाते हैं कुछ देर उड़ने के बाद उन्हें बर्फ में कुछ पैटर्न दिखाई देते हैं जो ज्यादा अजीब नहीं थे लेकिन तभी उनके जहाज में नेविगेशन के लिए लगाए गए मैकेनिकल इंस्ट्रूमेंट अजीब तरीके से व्यवहार करने लगते हैं अब इसका मतलब यह हुआ कि हवा में उड़ते हुए उन्हें यह पता नहीं चल रहा था कि वो किस दिशा की तरफ जा रहे हैं तो अपने प्लेन की सही दिशा पता लगाने के लिए वो सूरज का इस्तेमाल करते हैं जो कि नेवी ट्रेनिंग में सिखाया जाता है अब मैं आपको यह भी बता दूं कि जिस समय ये सारी घटनाएं हो रही थी तो एडमिरल रिचर्ड रेडियो की मदद से लगातार अपने बेस कैंप के साथ संपर्क में बने हुए थे यानी जो कुछ भी उनके साथ हो रहा था इसका ऑफिशियल रिकॉर्ड बनाया जा रहा था लेकिन वो वापस नहीं आते वो अपनी जर्नी को कंटिन्यू करते हैं और जैसे ही वो पहाड़ों के बीच में से धुंद को पार करके आगे बढ़ते हैं तो उन्हें हरे रंग के पहाड़ दिखाई देते हैं जिन पर ग्रीनरी थी और पहाड़ों के बीच में से पानी की नदी भी बह रही थी अब अंटार्कटिका में जहां इतनी ठंड पड़ती है वहां पर ग्रीनरी और पानी की झील ये तो नामुमकिन था लेकिन जो जो आंखों से दिख रहा था उसे कैसे झुट आएं जब वो अपने प्लेन को थोड़ा नीचे करते हैं तो उन्हें वहां पर बड़े-बड़े आकार के जानवर घास चढ़ते हुए दिखाई देते हैं और मजे की बात ये थी कि जैसे ही वो उस हरे पहाड़ के पास से उड़ते हैं उनका रेडियो संपर्क टूट जाता है अब ना तो बेस कैंप को यह पता था कि वो कहां है और ना ही वो अपनी मदद के लिए किसी को बुला सकते थे अब ये सारी चीजें इतनी अजीब थी कि एडमिरल रिचर्ड ये भूल जाते हैं कि अब चारों तरफ का वातावरण ठंडा है ही नहीं वो अपने ग्लव्स उतारते हैं और उन्हें ठंड महसूस नहीं हो रही थी उनके हवाई जहाज की कैनोपी छूने पर उन्हें गर्म महसूस होती है वो ठंडी नहीं थी और हवाई जहाज के बाहर का एक्सटर्नल टेंपरेचर जो इंडिकेटर पर दिखाई दे रहा था वो था 23 डिग्री सेल्सियस यानी 74 फट बिल्कुल परफेक्ट मौसम धीरे-धीरे उनके सारे इंस्ट्रूमेंट काम करने लगते हैं लेकिन उनका रेडियो नहीं चलता एडमिरल रिचर्ड अभी भी अपनी फ्लाइट को जारी रखते हैं और थोड़ा आगे चलने पर उन्हें जो दिखाई देता है वह सच में हैरान करने वाला था उन्हें एक चमचमा आता हुआ शहर दिखता है और जैसे ही वो उसकी रेंज में पहुंचते हैं अचानक से उनका प्लेन उनके कंट्रोल ल से बाहर हो जाता है यानी हवाई जहाज उड़ तो रहा था

लेकिन वो उनके कंट्रोल में बिल्कुल नहीं था तो किसके कंट्रोल में था और तभी उन्हें अपने प्लेन के दोनों तरफ दो अजीब से एयरक्राफ्ट दिखते हैं डिस्क शेप के एयरक्राफ्ट जिस पर नाज सिंबल बना हुआ था ये देखते ही एडमिरल रिचर्ड का पूरा शरीर ठंडा पड़ जाता है अब इससे पहले कि कुछ और होता एडमिरल रिचर्ड के प्लेन का इंजन बंद हो जाता है लेकिन प्लेन उड़ता रहता है तभी एडमिरल रिचर्ड से बराबर में उड़ रहे प्लेन संपर्क करते हैं और कहते हैं कि आप घबराएं नहीं आपका प्लेन हमारे कंट्रोल में है अब इसके बाद एडमिरल रिचर्ड के साथ क्या होता है वो मैं आपको बाद में बताऊंगा पहले ये जान लो कि 1991 में जो डॉक्यूमेंट लीक हुए थे आखिर उनमें ऐसा क्या लिखा था जिसे अमेरिकी सरकार बड़े लंबे समय से छुपाती हुई आ रही थी देखिए जी लिटिल अमेरिका नाम का जो कैंप इन्होंने वहां जाकर बनाया था उसको बनाने के दो दिन बाद ही रात के समय होराइजन पर इन्हें पांच ग्रीन लाइट दिखती हैं होराइजन बोले तो ऐसी जगह जहां पर ऐसा लगता है कि आकाश और पानी दोनों मिल गए हैं जैसा अक्सर समुद्र में दिखाई देता है सूरज के उगने और डूबने के समय मतलब ये तो आप जानते ही हो कि सूरज उगता और डूबता तो है नहीं पर मेरा इशारा आप समझ गए होंगे कि मैं क्या कहना चाह रहा हूं अब ये ग्रीन लाइट सीधा आकाश की तरफ उड़ती हैं और इनके पीछे-पीछे पांच और ग्रीन लाइट आती हैं जो बहुत तेजी से इनके कैंप की तरफ बढ़ती हैं

अब ये लोग घबराकर उन परे फायरिंग शुरू कर देते हैं और ये यूएस नेवी के ऑफिशियल डॉक्यूमेंट में लिखा हुआ है जो शिप का रेडियो ऑपरेटर था उसने अपनी साइटिंग्स में इस चीज को मेंशन किया कि कैसे पानी से अजीब डिस्क शेप के एयरक्राफ्ट निकलते हैं और उनके जहाज की तरफ बढ़ते हैं उस चीज का पीछा करने के लिए जब एयरक्राफ्ट उड़ाए गए तो एक जबरदस्त एनर्जी की बीम उस एयरक्राफ्ट से टकराती है और वो सीधा पानी में गिरता है और यूएसएस मैडॉक नाम की जो टोरपीडो बोट थी उसमें जबरदस्त तरीके से आग लगना शुरू हो जाती है और देखते ही देखते वो डूब जाती है और यह पहला अटैक था जो लगातार कई हफ्तों तक जारी रहते हैं अब ये सारी घटनाएं जब अमेरिकी नौसेना के कानों तक पहुंचती हैं यूएस में बैठे हुए अमेरिकी अफसरों के कानों तक पहुंचती हैं तो सरकार डिसीजन लेती है कि वहां से तुरंत निकल आओ जो नुकसान हो गया उसे छोड़ो जान बचाओ और तुरंत तुरंत निकलो अब वहां पर जो कुछ भी हुआ था इसको अमेरिकी सरकार ने कभी भी पब्लिक नहीं किया और ये जो लीक डॉक्यूमेंट थे इनको भी अमेरिकी सरकार ने झूठा बता दिया वो तो भला हो एडमिरल रिचर्ड की डायरी का जिसमें ये सारी चीजें लिखी थी और बाद में अमेरिकी सरकार ने उसे भी झूठा बता दिया एडमिरल रिचर्ड को लगता था कि ये जर्मन सीक्रेट वेपंस हैं जो उन लोगों ने बनाए हैं जो जर्मनी से भागकर अंटार्कटिका पहुंच गए थे और जर्मनी के इन वैज्ञानिकों और इंजीनियर्स का संपर्क उनसे हो गया है जिसका जिक्र हमने इस वीडियो की शुरुआत में किया था आप सही हो यानी आर्यंस क्योंकि इतनी एडवांस टेक्नोलॉजी उस समय एजिस्ट ही नहीं करती थी और आज भी यह चीज एक बहुत बड़ा राज है कि आखिर ऑपरेशन हाई जंप के समय वहां पर हुआ क्या था जिसको पता लगाने का सिर्फ एक ही तरीका है वो है अंटार्कटिका जाकर पता करना लेकिन सभी देशों ने मिलकर एक टीटी साइन कर ली कि कोई अंटार्कटिका जाएगा ही नहीं तो कुछ तो गड़बड़ है जाहिर सी बात है कुछ तो ऐसा है जिसको सब मिलकर छुपा रहे हैं अब बात करते हैं कि एडमिरल रिचर्ड के साथ बराबर में उड़ने वाले एयरक्राफ्ट्स ने जब संपर्क किया तो उसके बाद क्या हुआ अब देखिए जो एडमिरल रिचर्ड की डायरी में लिखा था पर्सनली मुझे उस पर यकीन बिल्कुल भी नहीं है लेकिन मेरा काम है आपको इंफॉर्मेशन देना तो मैं बता देता हूं एडमिरल रिचर्ड कहते हैं कि उनके एयरक्राफ्ट को कंट्रोल करके एक बहुत ही एडवांस जगह पर लैंड कराया जाता है एडवांस से उनका मतलब था कि उनका इंजन बंद था कंट्रोल उनके पास नहीं थे लेकिन अपने आप एयरक्राफ्ट लैंड कर जाता है और इसके बाद वो मिलते हैं ऐसे लोगों से जो बहुत लंबे थे और सबके सुनहरे बाल थे अब चाहे तो आप उन्हें आर्यंस कह लो या कुछ और कह लो मुझे यकीन नहीं है मेरे लिए ये चीज थोड़ी सी डाइजेस्ट करनी मुश्किल थी लेकिन मैं आपको एज इट इज बता रहा हूं जैसा उनकी डायरी में लिखा था इसके बाद ये लोग एडमिरल रिचर्ड को अपने कमांडर के पास लेकर जाते हैं जो उन्हें बताता है कि व काफी समय से धरती पर हैं और यहां पर ह्यूमंस को ऑब्जर्व कर रहे हैं लेकिन उन्होंने कभी भी ह्यूमन एक्टिविटीज के बीच में इंटरफेयर नहीं करा लेकिन अब वो कांटेक्ट करने की कोशिश कर रहे हैं वो कमांडर यह भी बताता है कि इंसान अभी भी एटॉमिक एनर्जी के लिए पूरी तरह से तैयार नहीं है और उन्हें इसके साथ ज्यादा खिलवाड़ नहीं करना चाहिए क्योंकि एटॉमिक एनर्जी के साथ जो वो कर रहे हैं यह चीज उनके ग्रह के लिए बहुत बड़ा खतरा बन जाएगी वो कमांडर यह भी बताता है कि जब भी उन्होंने संपर्क करने की कोशिश की तो उनके

शिप्स को चेज किया गया उन पर हमला किया गया तो अब यह एडमिरल रिचर्ड की जिम्मेदारी है कि वो यहां से वापस जाएं और अपने लोगों को समझाएं और मेरा मैसेज उन तक पहुंचाएं इसके बाद एडमिरल रिचर्ड को उनके एयरक्राफ्ट तक ले जाया जाता है और कुछ दूर तक एस्कॉर्ट करने के बाद उन्हें कहा जाता है कि अब आपका प्लेन आपके कंट्रोल में है अपने बेस पर लौट जाइए जब एडमिरल रिचर्ड वापस अमेरिका पहुंचते हैं तो इंटेरोगेशन के जब वो प्रेसिडेंट से मिलते हैं तो यह बात वो उन्हें बताते हैं ऐसा उनकी डायरी में लिखा है लेकिन उनसे मुंह बंद रखने के लिए कहा जाता है और जैसा कि मैंने आपको बताया था कि एडमिरल रिचर्ड पक्के देशभक्त थे तो उन्होंने अपने जीवन में दोबारा कभी भी ऑपरेशन हाई जमप से रिलेटेड एक भी शब्द पब्लिकली नहीं कहा था अब ये राज एडमिरल रिचर्ड के मरने के साथ ही दफन हो जाता है लेकिन उनके बेटे को उनकी डायरी मिल जाती है जो इसे पब्लिकली रिलीज कर देता है और जैसे ही ये डायरी रिलीज होती है इसके छ महीने के अंदर ही एंटार्कटिक ट्रीटी साइन हो जाती है कि भैया अब कोई भी अंटार्कटिका नहीं जाएगा यानी कि उन 12 देशों की परमिशन के बिना तो बिल्कुल नहीं जाएगा जो इस ट्रीटी के शुरुआती सिग्नेटरी थे जिनमें अमेरिका भी था तो क्या अंटार्कटिका में सीक्रेट नाजी बेस था क्या अंटार्कटिका में आर्यंस हैं अब जरा बात कर लेते हैं कि इसमें कितना सच है और कितना झूठ देखिए हमें यह बात 100% शर्टी के साथ नहीं पता कि जो डायरी एडमिरल रिचर्ड के बेटे ने पब्लिकली रिलीज करी थी क्या वो एडमिरल रिचर्ड की असली डायरी थी क्या ऐसी कोई डायरी भी थी हो सकता है एडमिरल रिचर्ड के बेटे ने अपने फादर के नाम के ऊपर पैसा कमाने के लिए इस तरह की डायरी को उनके नाम से बेचा हो और अगर आपको उनकी डायरी पढ़नी है तो इसके ऊपर जो किताब छपी है वो है द मिसिंग डायरी ऑफ एडमिरल बर्ड आप वो पढ़ सकते हैं और इस डायरी के ऊपर छपने वाली किताब लिखी थी रेमंड बर्नाड ने जो इस तरह की यूएफओ से रिलेटेड कहानियां लिखने के लिए फेमस थे अब जरा नाजियों के बारे में बात कर लेते हैं तो देखिए इसके तो पक्के सबूत हैं कि नाज अंटार्कटिका की तरफ गए थे यू बोट्स गई थी खाने पीने का सामान गया था कपड़े गए थे लेकिन इस चीज का सबूत नहीं मिला है कि नाजियों ने वहां पर एक बेस बना बनाया

था मतलब पब्लिक में कभी भी इस चीज की कोई भी जानकारी नहीं दी गई लेकिन अगर कोई ऐसा बेस बनाया भी गया था तो सरकार इस चीज को पब्लिक में आने भी नहीं देगी अब जरा बात करते हैं कौन-कौन सी चीजें वेरीफाई हो चुकी हैं देखिए अमेरिका का ऑपरेशन हाई जंप ये बिल्कुल वेरीफाइड है और यह बात भी सच है कि अमेरिका ने ऑपरेशन हाई जंप का रियल पर्पस लोगों से छुपाया था और अंटार्कटिका से वापस आने के बाद एडमिरल रिचर्ड का न्यूज़पेपर को दिया गया इंटरव्यू भी बिल्कुल ठीक है जिसमें उन्होंने यूएफओ साइटिंग्स के बारे में बताया था कि कि कैसे उन पर एडवांस हथियारों से हमला हुआ था अब देखिए ऐसा नहीं था कि अमेरिका के अंदर बैठे हुए लोग ही अमेरिकी सरकार की पोल पट्टी खोलने में लगे हुए थे बल्कि रशिया की तरफ से भी एक डॉक्यूमेंट्री रिलीज करी गई थी कि कैसे ऑपरेशन हाई जंप के दौरान अन आइडेंटिफिकेशन री के साथ अंटार्कटिका पहुंची थी तो ये सिर्फ वेदर स्टडी को करने के लिए तो इतने हथियार जाएंगे नहीं तो कुछ तो ऐसा है जो सरकार छुपा रही है दूसरी चीज है अंटार्कटिका ट्रीटी तीसरी चीज है 3 घंटे के लिए एडमिरल रिचर्ड के प्लेन का गायब हो जाना वो प्लेन 3 घंटे उड़ने के लिए बना ही नहीं था तो आखिर उनके हवाई जहाज का तेल खत्म क्यों नहीं हुआ

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here